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भारत में शिक्षित बेरोजगारी: साक्षरता के बावजूद रोजगार का संकट

भारत में 2025 में एक विचित्र स्थिति देखने को मिल रही है – देश के कई उच्च साक्षरता वाले राज्य शिक्षा में तो आगे हैं, लेकिन रोजगार सृजन में पिछड़ रहे हैं।

भारत में शिक्षित बेरोजगारी

केरल, गोवा और मिजोरम जैसे राज्य जहाँ साक्षरता दर 90% से अधिक है, वहीं भारत में शिक्षित बेरोजगारी की सबसे बड़ी समस्या भी यहीं पर देखने को मिल रही है।


भारत में शिक्षित बेरोजगारी का वास्तविक चित्र

  • केरल की साक्षरता दर 95% से अधिक है — जो देश में सबसे ऊँची मानी जाती है।
  • गोवा और मिजोरम भी 90% से अधिक साक्षरता दर हासिल कर चुके हैं।
  • लेकिन इन राज्यों में शिक्षा से रोजगार तक का रास्ता बेहद कठिन बन गया है।
  • केरल में लगभग 30% युवा बेरोजगार हैं।
  • गोवा में बेरोजगारी दर लगभग 19% है।
  • मिजोरम में करीब 12% युवा शिक्षित होने के बावजूद नौकरी से वंचित हैं।

यह स्थिति “Educated Unemployment” कहलाती है – जहाँ पढ़े-लिखे लोग भी नौकरी पाने में असफल रहते हैं। यह साबित करता है कि केवल साक्षर होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि आज के युग में कौशल आधारित शिक्षा ही वास्तविक रोजगार का मार्ग है।


क्यों बढ़ रही है भारत में शिक्षित बेरोजगारी?

  1. शिक्षा की गुणवत्ता और बाज़ार की ज़रूरतों में असमानता:
    • भारत में साक्षरता को केवल पढ़ना-लिखना समझा जाता है,
    • जबकि आज के समय में डिजिटल स्किल्स, तकनीकी ज्ञान और व्यावसायिक प्रशिक्षण आवश्यक हैं।
  2. डिग्रियों और उद्योगों के बीच असंतुलन:
    • केरल, गोवा और मिजोरम के अधिकांश स्नातक कला और वाणिज्य विषयों से हैं,
    • जबकि नौकरियाँ टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में बढ़ रही हैं।
  3. आर्थिक निर्भरता और सीमित अवसर:
    • गोवा में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था केवल मौसमी नौकरियाँ देती है।
    • मिजोरम सरकारी नौकरियों पर अत्यधिक निर्भर है, जिससे अवसर सीमित हो जाते हैं।
  4. विदेशों की ओर पलायन:
    कई शिक्षित युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेशों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे घरेलू रोजगार तंत्र कमजोर पड़ रहा है।

दूसरे राज्यों से सीख: रोजगार और शिक्षा का संतुलन

हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों ने व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा और स्थानीय उद्योगों पर ध्यान देकर बेहतर रोजगार अवसर बनाए हैं।

पर्यटन, बागवानी, जलविद्युत और छोटे उद्योगों ने इन राज्यों में शिक्षा को आर्थिक विकास से जोड़ने का मार्ग दिखाया है।


समाधान: शिक्षा को रोजगार से जोड़ना जरूरी

  • भारत के लिए शिक्षा का उद्देश्य अब केवल साक्षरता नहीं रह गया है,
  • बल्कि कौशल आधारित साक्षरता की आवश्यकता है।
  • सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर ऐसे कार्यक्रम शुरू करने चाहिए
  • जो युवाओं को बदलते उद्योगों के अनुसार स्किल और रोजगार दोनों प्रदान करें।

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भारत में शिक्षित बेरोजगारी से सीख

भारत के सबसे साक्षर राज्य भले ही शिक्षा में अग्रणी हों, लेकिन भारत में शिक्षित बेरोजगारी की चुनौती यह दिखाती है कि साक्षरता को रोजगार में बदलना ही असली विकास है।

अब जरूरत है ऐसी शिक्षा नीति की, जो केवल डिग्रियाँ नहीं बल्कि जीविका के अवसर भी दे।

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