क्रांति, जेल की यातना, फाँसी… बीना दास और राजगुरु की अमर कहानियाँ
बीना दास का जन्म 1911 में एक शिक्षित और समाजसेवी परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही अन्याय के विरुद्ध थीं और कॉलेज के समय ‘छात्रि संघ’ जैसी संगठनों से जुड़ गईं।

6 फरवरी 1932 को स्नातक दीक्षान्त समारोह के दिन, बीना दास ने इंग्लैंड के गवर्नर स्टेनली जैक्सन पर गोली चलाई। यह साहसिक घटना ब्रिटिश सत्ता को हिला गई।
“मैं मरना चाहती थी, लेकिन लड़ते-लड़ते सम्मान से मरना चाहती थी।“
विरोध की कीमत: जेल की पीड़ा और बहादुरी
बीना दास को धारा 307 के तहत 9 साल की सज़ा मिली। जेल में उन्हें ज़बरदस्त शारीरिक और मानसिक यातना दी गई, लेकिन उन्होंने अपने साथियों का नाम कभी नहीं बताया। उनकी क्रांतिकारी सोच और दोस्तों जैसे कमला दास गुप्ता और सुहासिनी गांगुली से उन्हें ताकत मिलती रही।
जेल की पीड़ा झेलने के बाद महात्मा गांधी के प्रयासों से 1939 में उन्हें छोड़ा गया, और उन्होंने फिर से ‘भारत छोड़ो आंदोलन‘ में हिस्सा लिया।
राजगुरु: फाँसी और अनंत बलिदान
राजगुरु, महाराष्ट्र में जन्मे क्रांति के प्रतीक थे। उनकी दोस्ती भगत सिंह और सुखदेव से हुई।
लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए 1928 में सांडर्स की हत्या की गई।
राजगुरु और उनके साथी गिरफ्तार हुए, उन पर अत्याचार हुए, लेकिन वे कभी नहीं डरे।
“इंकलाब जिंदाबाद!” का नारा लगाते हुए, महज़ 22 साल की उम्र में, राजगुरु ने हंसते-हंसते फाँसी को गले लगा लिया।
उनकी बहादुरी और आत्म-बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरित करता है.
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संघर्ष के बाद विचार
बीना दास जेल से निकलने के बाद भी समाज सेवा में जुटी रहीं।
वे समाजवादी विचारों से प्रभावित थीं, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी नहीं।
स्वतंत्रता के बाद, राजनीति में भी सक्रिय रहीं, लेकिन जीवन के अंतिम वर्ष निर्धनता में गुजारे।
राजगुरु हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे
और उनकी क्रांतिकारी भावना आज भी लोगों में ऊर्जा भरती है।
निष्कर्ष: अमर विरासत
बीना दास और राजगुरु की कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि असली आज़ादी सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि साहस, त्याग और संघर्ष की गहराई से मिलती है।
जेल की यातना, खून से लिखी क्रांति, और हँसते हुए फाँसी को अपनाने वालों की अमर विरासत हर इंसान को प्रेरित करती है—आजादी की रक्षा और सम्मान के लिए।
इनकी गाथाएँ सिर्फ इतिहास नहीं, हर उस भारतीय के लिए राह हैं, जो अन्याय से लड़ना चाहता है।
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