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Tenant Ownership Supreme Court: Is it so easy to change ownership? किराएदार मालिक नहीं बन सकता, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कानून

भारत में संपत्ति और किरायेदारी से जुड़े विवाद अक्सर सामने आते रहते हैं। कई बार यह धारणा बन जाती है कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक किसी घर या दुकान में किराए पर रहता है, तो वह उस संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा कर सकता है। लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कानून की स्थिति को साफ कर दिया है।

Tenant Ownership Supreme Court

Tenant Ownership Supreme Court: दरअसल, Is it so easy to change ownership? इस सवाल का जवाब देते हुए अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक किसी संपत्ति में रहने से मालिकाना हक नहीं मिल जाता।


सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने Jyoti Sharma vs Vishnu Goyal मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि कोई भी किराएदार केवल इसलिए मालिक नहीं बन सकता क्योंकि वह लंबे समय से उस संपत्ति में रह रहा है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किराएदार और मालिक के बीच का संबंध कानूनी अनुबंध पर आधारित होता है। इसलिए किरायेदारी की स्थिति में रहने वाला व्यक्ति संपत्ति पर स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता।


क्या होता है adverse possession

कई लोग “एडवर्स पजेशन” यानी प्रतिकूल कब्जे के नियम को लेकर भ्रमित रहते हैं। इस नियम के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में लंबे समय तक बिना अनुमति के कब्जा रखने वाला व्यक्ति स्वामित्व का दावा कर सकता है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत किरायेदारों पर लागू नहीं होता।

क्योंकि किरायेदार का कब्जा मालिक की अनुमति से होता है।


Tenant Ownership Supreme Court: किराएदार और मालिक के अधिकार

भारतीय कानून में किराएदार और मकान मालिक दोनों के अधिकार तय किए गए हैं।

किराएदार को संपत्ति का उपयोग करने का अधिकार होता है, लेकिन मालिकाना हक मकान मालिक के पास ही रहता है।

इसलिए अगर कोई व्यक्ति किराए पर रह रहा है, तो वह उस संपत्ति का स्वामी नहीं बन सकता,

चाहे वह वहां कई वर्षों से क्यों न रह रहा हो।


क्यों पैदा होता है यह भ्रम

अक्सर लंबे समय तक एक ही जगह रहने के कारण किराएदार और आसपास के लोगों के बीच यह धारणा बन जाती है कि उस व्यक्ति का उस घर पर अधिकार है। कई बार दस्तावेजों की जानकारी की कमी और कानूनी प्रक्रिया की समझ न होने के कारण भी ऐसा भ्रम पैदा हो जाता है।


अदालत की टिप्पणी क्यों महत्वपूर्ण है

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संपत्ति विवाद से जुड़े कई भ्रम दूर होते हैं। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि किराएदार का अधिकार केवल किरायेदारी तक सीमित है और उसे मालिकाना हक में नहीं बदला जा सकता।

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संपत्ति विवाद से कैसे बचें

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार संपत्ति से जुड़े विवादों से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं।

  • किरायेदारी का लिखित समझौता होना चाहिए
  • किराया भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए
  • संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेज सही होने चाहिए

इन उपायों से भविष्य में होने वाले विवादों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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