साइको किलर पूनम का खौफनाक सच: हत्या से 48 घंटे पहले चुनती थी लक्ष्य, भरोसा जीतकर फँसाती थी मासूम बच्चे
भारत की अपराध दुनिया में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने समाज को झकझोर कर रख दिया। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जिसमें पूनम, जिसे लोग ‘साइको किलर’ कहने लगे हैं, मासूम बच्चों को अपना शिकार बनाती रही। उसकी कार्यप्रणाली जितनी खतरनाक थी, उतनी ही चौंकाने वाली भी। जाँच एजेंसियों के अनुसार, वह अपने हर अपराध से करीब 48 घंटे पहले अपने लक्ष्य का चयन करती थी।

यह कहानी केवल अपराध की नहीं, बल्कि समाज को यह चेतावनी भी देती है
कि विश्वास और मासूमियत को कैसे अपराधी अपना हथियार बना लेते हैं।
लक्ष्य चुनने का पैटर्न: 48 घंटे पहले बनाती थी प्लान
जाँच में पता चला कि साइको किलर पूनम अपने शिकार को अचानक नहीं चुनती थी। वह:
- बच्चों की गतिविधियाँ देखती
- उनके परिवार के रूटीन को समझती
- आसपास के माहौल को जानती
- परिवार के विश्वास का फायदा उठाती
यह सब वह हत्या से ठीक 48 घंटे पहले करती थी,
ताकि बच्चा और परिवार उसे पहचानने लगें और उसकी उपस्थिति पर किसी को संदेह न हो।
भरोसा जीतने की खतरनाक रणनीति
साइको किलर पूनम का सबसे खतरनाक हथियार था – भरोसा।
वह मासूम बच्चों से ऐसे घुल-मिल जाती थी जैसे कोई पड़ोसन, कोई रिश्तेदार या कोई परिचित महिला हो।
वह बच्चों से:
- बातचीत करती
- टॉफी/खिलौने देती
- स्कूल आने–जाने पर ध्यान देती
- माता-पिता से पहचान बढ़ाती
धीरे-धीरे बच्चे उसके साथ सहज महसूस करने लगते थे,
और परिवार भी उसकी मौजूदगी को सामान्य मान लेता था।
यही भरोसा बाद में उसके अपराध का सबसे बड़ा साधन बन जाता था।
अपराध की वजहें अभी भी रहस्य
जाँच के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह रहा कि-
पूनम मासूम बच्चों को ही क्यों निशाना बनाती थी?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार:
- उसके अंदर गहरी मानसिक विकृति हो सकती है
- बचपन का कोई अनसुलझा ट्रॉमा
- सामाजिक अस्वीकार्यता
- अपराध के प्रति मनोवैज्ञानिक आकर्षण
जाँच एजेंसियों के साथ कई मनोचिकित्सक भी इस केस का अध्ययन कर रहे हैं,
ताकि समझा जा सके कि एक महिला इतने भयावह अपराधों तक कैसे पहुँच सकती है।
समाज के लिए बड़ा सबक: अजनबी ही खतरा नहीं होते
यह मामला समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है-
“खतरा हमेशा अजनबी से नहीं होता; कई बार खतरा उसी से होता है जो आपके आस-पास मौजूद होता है और भरोसे का चोला पहनकर घूमता है।”
माता-पिता को चाहिए कि:
- बच्चों को सतर्क रहने की सीख दें
- उन्हें गुड टच–बैड टच की जानकारी दें
- किसी भी अनजान या कम परिचित व्यक्ति से बातचीत करने से पहले माता-पिता को बताने के लिए कहें
- बच्चों की सुरक्षा को हल्के में न लें
- परिवार के बाहर किसी से भी अति-निकटता पर ध्यान दें
इस केस ने साबित किया कि सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।
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जाँच एजेंसियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण मामला
पूनम का केस पुलिस के लिए बेहद पेचीदा रहा।
- कोई स्पष्ट पैटर्न नहीं
- भरोसे का जाल
- अपराध के बाद सामान्य व्यवहार
- पहचान छिपाने की क्षमता
इन सबके कारण जाँच में कई बाधाएँ आईं।
लेकिन अंततः तकनीकी सबूतों और मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर पूनम को गिरफ्तार किया गया।
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