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मथुरा मालगाड़ी पटरी से उतरी: उत्तर प्रदेश में रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित

मंगलवार रात उत्तर प्रदेश के मथुरा के पास एक मालगाड़ी पटरी से उतरने की घटना ने पूरे राज्य में रेल यातायात को अस्त-व्यस्त कर दिया। यह हादसा उत्तर भारत की सबसे व्यस्त रेल लाइनों में से एक पर हुआ, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना रात लगभग 8 बजे के बाद वृंदावन रोड और अजहाई स्टेशन के बीच आगरा–दिल्ली मार्ग पर हुई, जो आगरा डिवीजन के मथुरा–पलवल सेक्शन के अंतर्गत आता है।

मथुरा मालगाड़ी पटरी से उतरी

क्या हुआ था इस हादसे के दौरान?

रिपोर्टों के अनुसार, यह मालगाड़ी कोयला लेकर एक थर्मल पावर प्लांट जा रही थी, जब अचानक उसकी 12 बोगियां पटरी से उतर गईं। ये बोगियां उलटकर कई रेल ट्रैक अवरुद्ध कर गईं। सौभाग्य से, ट्रेन के चालक दल या आसपास के किसी व्यक्ति को चोट नहीं लगी।

हादसे के सटीक कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन रेलवे ने जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक संदेह ट्रैक में खराबी, रखरखाव की कमी या किसी बाहरी कारण पर जताया जा रहा है।


रेल सेवाएं ठप

इस घटना के बाद दिल्ली–आगरा और दिल्ली–झांसी–कोटा मार्गों पर रेल सेवाएं बाधित हो गईं।

मलबे के कारण क्षेत्र की चार में से तीन ट्रैक पूरी तरह बंद हो गईं।

केवल चौथी लाइन को अस्थायी रूप से चालू किया गया, लेकिन उसे भी जांच के बाद ही फिर से उपयोग में लाया गया। मथुरा जंक्शन, जो उत्तरी रेलवे का एक प्रमुख केंद्र है, वहां से गुजरने वाली कई यात्री और डाक गाड़ियाँ या तो रद्द की गईं या अन्य मार्गों पर मोड़ दी गईं। दिल्ली, आगरा, मुंबई और दक्षिण भारत जाने वाली ट्रेनों को गाजियाबाद और टुंडला जैसे वैकल्पिक रास्तों से भेजा गया।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 30 यात्री ट्रेनें देरी से चलीं, जिससे हजारों यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा।


बचाव और मरम्मत कार्य में जुटा रेलवे प्रशासन

उत्तर मध्य रेलवे ने बचाव और मरम्मत कार्य के लिए तत्काल एक बड़ी टीम तैनात की। लगभग 500 रेलवे कर्मचारी, तकनीकी विशेषज्ञ, और दुर्घटना राहत ट्रेनें आगरा, दिल्ली और मुरादाबाद से घटनास्थल पर भेजी गईं।

राहतकर्मी पूरी रात मलबा हटाने, क्षतिग्रस्त डिब्बे हटाने और ट्रैक की मरम्मत में जुटे रहे।

उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और मंडल रेल प्रबंधक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, एक ट्रैक पर डाउन ट्रेनें फिर से चलाई गई हैं,

लेकिन पूरी तरह से सेवा बहाल होने में अभी समय लगेगा क्योंकि क्षति काफी गंभीर है।


जांच शुरू

रेल मंत्रालय ने इस घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

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प्रारंभिक रिपोर्टों में कहा गया है कि यह ट्रैक पहले भी कई तकनीकी समस्याओं का सामना कर चुका था।

यह भी देखा जाएगा कि क्या इस हादसे में तोड़फोड़, ट्रैक की कमजोरी या संचालन संबंधी गलती शामिल थी।


लोगों और उद्योगों पर असर

हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन यह घटना भारतीय रेल की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठाती है। इस तरह के हादसे न केवल यात्रियों की सुविधा को प्रभावित करते हैं बल्कि कोयला जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति में भी बाधा डालते हैं, जो बिजली उत्पादन और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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