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कालंदी गांव में दिवाली हिंसा: महिलाओं पर विवाद से शुरू हुई झड़प बनी डरावनी गोलीबारी

मेरठ जिले के कालंदी गांव में दिवाली हिंसा की एक भयावह घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। त्योहार की रात मस्ती और उत्सव के माहौल में अचानक झगड़ा शुरू हुआ जो देखते ही देखते हिंसा, गोलीबारी और अफरा-तफरी में बदल गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह झगड़ा महिलाओं के व्यवहार को लेकर हुई बहस से शुरू हुआ था, जो दो गुटों के बीच संघर्ष में बदल गया।

कालंदी गांव में दिवाली हिंसा

कई घंटे तक चली लाठीचार्ज, फायरिंग और पत्थरबाज़ी ने गांव को दहशत के माहौल में डाल दिया, जब तक कि पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया।


दिवाली की खुशियां बनीं दहशत का कारण

दिवाली की रात जब पूरा गांव उत्सव में डूबा था, तभी दो पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ। पहले तो मामला बहस तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे यह झगड़ा उग्र होता गया। लोगों ने लाठियां और देसी हथियार उठा लिए, और खुशी का माहौल युद्ध के मैदान में बदल गया। कालंदी गांव में दिवाली हिंसा के दौरान कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। पुलिस मौके पर लगभग आधे घंटे बाद पहुंची, लेकिन तब तक नुकसान काफी हो चुका था। कई लोग घायल हो गए और पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया।


पुलिस की कार्रवाई और जांच की दिशा

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तुरंत लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर किया। नियंत्रण पाने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों पक्षों के करीब बीस लोगों को गिरफ्तार किया। घटनास्थल से कई वाहन, लाइसेंस प्राप्त हथियार और देसी पिस्तौलें बरामद की गईं।

इन हथियारों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, और अगर पाया गया कि इनका दुरुपयोग हुआ है,

तो लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। इस झगड़े की जड़ भले ही दिवाली का विवाद था,

लेकिन इसके पीछे ग्राम प्रधान चुनावों से जुड़ी राजनीतिक तनातनी भी एक कारण हो सकती है।


राजनीतिक पृष्ठभूमि और पुरानी रंजिशें

ग्रामीण उत्तर प्रदेश के कई इलाकों की तरह यहां भी पुरानी रंजिशें और जातीय तनाव अक्सर उभर आते हैं।

राजनीतिक सीजन या चुनावों के दौरान यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।

जब पुरानी दुश्मनी और चुनावी माहौल ने मिलकर एक मामूली विवाद को हिंसा में बदल दिया।

पुलिस ने हालात पर पूरी तरह काबू पा लिया है, गांव में डर और तनाव अभी भी बना हुआ है

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समाज पर असर

कालंदी के लोगों के लिए यह घटना एक कड़वी याद बन गई। त्योहार की रात को मिली यह भयावह अनुभव यह दिखाता है कि सामाजिक संवाद और शांति कितनी जरूरी है। पुलिस और प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न दोहराई जाएं।

समाज में शांति और भरोसा कायम करने के लिए नेताओं, पुलिस और समुदायों को मिलकर काम करना होगा।

जब तक संवाद और समझदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक खुशी के त्योहार भी तनाव में बदल सकते हैं।

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