ईरान युद्ध में कौन किसके साथ: बदलते वैश्विक समीकरण की पूरी कहानी
मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब वैश्विक स्तर पर बड़ा रूप ले चुका है। अमेरिका और इज़राइल बनाम ईरान के बीच संघर्ष ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट दिया है। हर देश अपनी रणनीति, हित और कूटनीति के आधार पर किसी न किसी पक्ष के करीब खड़ा दिखाई दे रहा है।

ईरान युद्ध में कौन किसके साथ: ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—ईरान के साथ कितने देश हैं और कौन अमेरिका-इज़राइल का समर्थन कर रहा है?
अमेरिका और इज़राइल के साथ खड़े देश
अमेरिका और इज़राइल को कई पश्चिमी और सहयोगी देशों का समर्थन मिला है। रिपोर्ट्स के अनुसार:
- यूरोप के कई देश जैसे जर्मनी, फिनलैंड, चेक गणराज्य, रोमानिया
- अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड
- कुछ अन्य देश जैसे अर्जेंटीना, यूक्रेन
इन देशों ने सीधे या परोक्ष रूप से अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई का समर्थन किया है।
इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र के कुछ देश जैसे:
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- बहरीन
- कुवैत
इन देशों ने भी ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, हालांकि कई मामलों में उन्होंने संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।
हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 20 से अधिक देशों का एक गठबंधन समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के लिए अमेरिका के साथ काम कर रहा है।
ईरान के समर्थन में कौन-कौन
ईरान को सीधे सैन्य समर्थन भले कम मिल रहा हो, लेकिन कई देश और संगठन उसके साथ खड़े हैं।
प्रमुख देश:
- रूस
- चीन
इन दोनों देशों ने अमेरिका-इज़राइल की कार्रवाई की आलोचना की है, हालांकि उन्होंने सीधे युद्ध में हिस्सा नहीं लिया है।
ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी:
- लेबनान का हिज़्बुल्लाह
- यमन के हूती विद्रोही
- इराक और सीरिया के कई मिलिशिया समूह
- फिलिस्तीनी संगठन
इन समूहों को अक्सर “Axis of Resistance” कहा जाता है, जो ईरान के साथ मिलकर क्षेत्र में सक्रिय हैं।
तटस्थ या संतुलन बनाए रखने वाले देश
दुनिया के कई बड़े देश इस युद्ध में सीधे शामिल होने से बच रहे हैं और संतुलित नीति अपना रहे हैं।
- भारत
- कतर
- ओमान
- जॉर्डन
ये देश शांति और संवाद की अपील कर रहे हैं, क्योंकि युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।
क्यों बंट रही है दुनिया
इस युद्ध में देशों के रुख के पीछे कई कारण हैं:
1. रणनीतिक हित
तेल, गैस और समुद्री मार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) पर नियंत्रण बहुत अहम है।
2. राजनीतिक गठबंधन
अमेरिका के सहयोगी देश स्वाभाविक रूप से उसके साथ खड़े हैं, जबकि रूस और चीन जैसे देश अलग ध्रुव बनाते हैं।
3. क्षेत्रीय सुरक्षा
मध्य पूर्व के देश अपनी सुरक्षा और स्थिरता को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं।
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क्या बन रही है नई वैश्विक धुरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संघर्ष सिर्फ एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि नई वैश्विक शक्ति संतुलन की शुरुआत हो सकता है।
- एक ओर अमेरिका और उसके सहयोगी
- दूसरी ओर ईरान के साथ खड़े देश और संगठन
- बीच में संतुलन साधने वाले राष्ट्र
यह स्थिति आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति को पूरी तरह बदल सकती है।
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