श्रीनगर के पंथाचौक अमरनाथ यात्रा ट्रांजिट कैंप में खुद को गोली मारने के बाद सीआरपीएफ जवान की हालत गंभीर
श्रीनगर, 10 अगस्त: पंथाचौक अमरनाथ यात्रा ट्रांज़िट कैंप में एक सीआरपीएफ जवान ने खुद को गोली मार ली और वह गंभीर हालत में है। शनिवार को हुई इस घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। इस घटना से उनके साथी बेहद चिंतित और दुखी हैं, जबकि अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं।

घटना की जानकारी
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जवान अमरनाथ यात्रा 2025 के दौरान सख़्त सुरक्षा वाले पंथाचौक ट्रांज़िट कैंप में तैनात था। ड्यूटी के दौरान उसने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली। गोली चलने की आवाज़ से कैंप में मौजूद लोग घबरा गए। साथी जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल को सेना के 92 बेस अस्पताल, श्रीनगर ले जाया गया, जहां उसकी हालत नाज़ुक बनी हुई है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना सुबह के शुरुआती घंटों में हुई और मामले की जांच के लिए सभी मानक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।
संभावित कारण
जवान द्वारा इतना बड़ा कदम उठाने के पीछे का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सीआरपीएफ के शुरुआती सूत्रों का कहना है कि तनाव, निजी परेशानियां या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं इसका कारण हो सकती हैं।
जांच पूरी होने तक अधिकारियों ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
हाल के वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से सुरक्षाबलों द्वारा खुद को नुकसान पहुँचाने की घटनाएं बढ़ी हैं,
जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है।
विशेषज्ञ लगातार सुरक्षाबलों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
पंथाचौक ट्रांज़िट कैंप के बारे में
पंथाचौक अमरनाथ यात्रा ट्रांज़िट कैंप जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ गुफा मंदिर की यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक अहम ठहराव स्थल है।
यह कैंप सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की 24×7 निगरानी में रहता है।
अमरनाथ यात्रा सीजन के दौरान हज़ारों यात्री इस कैंप से गुजरते हैं,
जिससे यहाँ सुरक्षा इंतज़ाम बेहद सख्त और ड्यूटी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया
श्रीनगर में सीआरपीएफ प्रवक्ता ने कहा, “हम पंथाचौक में हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हैं। घायल जवान को सर्वोत्तम चिकित्सकीय सुविधा दी जा रही है। मामले की जांच के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।”
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया है और सीआरपीएफ अधिकारियों के साथ मिलकर जांच कर रही है।
मानसिक स्वास्थ्य – बढ़ती चिंता
यह घटना फिर से इस ओर इशारा करती है कि भारत के सुरक्षा बल कितने मानसिक दबाव में काम करते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, मनोरंजन के साधनों की कमी और लगातार खतरनाक माहौल में काम करना तनाव को बढ़ा देता है।
गृह मंत्रालय ने हाल के वर्षों में परामर्श सत्र, तनाव प्रबंधन कोर्स और छुट्टी नीति में सुधार जैसे कई कल्याणकारी कदम उठाए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या की जड़ तक पहुंचना ज़रूरी है।
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जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस खबर ने लोगों को भावुक कर दिया है।
सरकार से सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने की अपील की।
कुछ लोगों ने नियमित मनोवैज्ञानिक जांच को अनिवार्य बनाने की मांग भी की।
पंथाचौक की यह घटना भारत के सुरक्षा बलों के त्याग और दबाव की एक दुखद याद दिलाती है।
जब देश घायल जवान की सलामती की दुआ कर रहा है,
यह समय सरकार के लिए मानसिक स्वास्थ्य नीतियों पर पुनर्विचार करने और यह सुनिश्चित करने का है
कि देश की रक्षा करने वाले जवान हर दृष्टि से सुरक्षित और देखभाल में रहें
— केवल शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी।
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