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चित्रकूट पेंशन घोटाला: पाँच मृत पेंशनभोगियों के खातों में ₹13 करोड़ ट्रांसफर, जाँच शुरू हुई, तो फाइलें डिलीट!

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट पेंशन घोटाला ने पूरे देश को हिला दिया है। यह हाल के समय के सबसे चौंकाने वाले वित्तीय घोटालों में से एक है, जिसने बुजुर्गों और निर्बल वर्ग के लिए बनी सरकारी योजनाओं पर लोगों का भरोसा डगमगा दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि पाँच मृत पेंशनधारकों के खातों में ₹13 करोड़ से अधिक की राशि भेजी गई, जबकि उनके निधन के रिकॉर्ड पहले से मौजूद थे।

चित्रकूट पेंशन घोटाला

जांचकर्ताओं को शक है कि यह घोटाला सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि दर्जनों करोड़ रुपये तक फैला हुआ है। जैसे-जैसे जांच गहराई में गई, वैसे-वैसे कई फाइलें सरकारी रिकॉर्ड से गायब कर दी गईं, जिससे सच्चाई तक पहुँचना और मुश्किल हो गया।

अब तक 11 लोगों ने ₹46.52 लाख वापस लौटाए हैं, लेकिन अभी भी कई सवाल और करोड़ों रुपये बकाया हैं।


घोटाला कैसे हुआ

यह फर्जीवाड़ा तब सामने आया जब विशेष जांच दल (SIT) ने चित्रकूट ज़िले की ट्रेजरी से अजीब पेंशन भुगतानों की शिकायतों की जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि 2018 से लेकर 2025 तक मरे हुए पेंशनरों की फाइलें फिर से सक्रिय कर दी गईं और लगातार उनके खातों में पैसा भेजा जाता रहा।

पाँच मृत व्यक्तियों के खातों में ₹13.2 करोड़ ट्रांसफर किए गए, जिसमें एक खाते में अकेले ₹4 करोड़ जमा हुए।

यह घोटाला डिजिटल डेटा में छेड़छाड़ के जरिए किया गया।

नकली “लाइफ सर्टिफिकेट” और फर्जी पहचान के दस्तावेजों से मृत व्यक्तियों की फाइलें दोबारा सक्रिय की गईं।

कई मामलों में ट्रेजरी अधिकारियों ने स्वयं बैंक खाते खोले और मृतकों के नाम पर धनराशि निकालकर कारों और संपत्तियों में निवेश किया।


सबूत मिटाने की कोशिश

जैसे ही FIR दर्ज हुई और जांच तेज़ हुई, अधिकारियों ने पाया कि कई अहम फाइलें और डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम से डिलीट कर दिए गए। यह साफ था कि सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी।

इस डिजिटल छेड़छाड़ ने ऑडिट टीम और पुलिस के लिए जांच को बेहद मुश्किल बना दिया।

SIT प्रमुख अरविंद कुमार वर्मा की देखरेख में अब अंतिम फाइलों की जांच चल रही है।

मुख्य आरोपी रहे पूर्व सहायक ट्रेजरी अकाउंटेंट संदीप कुमार श्रीवास्तव की संदिग्ध मौत ने केस को और जटिल बना दिया है।


जनता की प्रतिक्रिया और रकम की वापसी

अब तक 11 लोगों ने अपनी गलती मानते हुए ₹46.52 लाख वापस किए हैं।

अधिकारियों ने कहा है कि जो लोग स्वयं पैसा लौटाएंगे, उन्हें राहत मिल सकती है,

लेकिन बाकी आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाएगा।

इस घोटाले में 93 वरिष्ठ नागरिक और पारिवारिक पेंशनधारक जांच के घेरे में हैं,

जिनमें कई शिक्षा विभाग और अन्य सरकारी कार्यालयों से जुड़े थे।

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हमने क्या सीखा और आगे क्या ज़रूरी है

चित्रकूट पेंशन घोटाला यह दिखाता है कि भारत की कल्याणकारी योजनाओं में अब भी निगरानी, डेटा अपडेट और पारदर्शिता की भारी कमी है।

इस घटना से जो बातें सामने आईं:

  • मृतकों के रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किए जाते।
  • अधिकारी और बाहरी लोग मिलकर फर्जी भुगतान करवाते हैं।
  • डिजिटल सुरक्षा और ऑडिट सिस्टम कमजोर हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन को वास्तविक समय (real-time) में लागू करना होगा। साथ ही पारदर्शी ऑडिटिंग और खुली रिपोर्टिंग की ज़रूरत है ताकि सरकारी पेंशन योजनाओं में जनता का भरोसा दोबारा बहाल हो सके। जैसे-जैसे चित्रकूट पेंशन घोटाले की जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि जवाबदेही और डिजिटल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, वरना ऐसे घोटाले आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते रहेंगे।

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