भुनी टोल प्लाज़ा का लाइसेंस रद्द: जवान पर हमला करने वाले 6 गिरफ्तार, ₹20 लाख जुर्माना
टोल प्लाज़ा बनाए ही इसलिए जाते हैं ताकि यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा मिले, सड़कें अच्छी स्थिति में रहें और इंफ्रास्ट्रक्चर की देखभाल के लिए उचित शुल्क लिया जा सके। लेकिन जब ये स्थान अपराध, उत्पीड़न और हिंसा के अड्डे बन जाते हैं, तो जनता का विश्वास डगमगा जाता है। भुनी टोल प्लाज़ा पर भी ऐसा ही हुआ, जब कर्मचारियों ने एक आर्मी जवान पर हमला कर दिया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

क्या हुआ भुनी टोल प्लाज़ा पर (Bhuni toll incident)?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक आर्मी जवान (Army Jawan Attacked) ने टोल कर्मचारियों से उनके दुर्व्यवहार को लेकर सवाल किया। आरोप है कि कर्मचारियों ने जवाब देने की बजाय जवान के साथ बदसलूकी और मारपीट कर दी।
गवाहों का कहना है कि जवान को धक्का दिया गया, उस पर चिल्लाया गया और बुरी तरह पीटा गया। कुछ ही देर में अन्य यात्री भी शामिल हो गए और घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। चंद घंटों में ही मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया और लोग न्याय की मांग करने लगे।
इससे पहले भी भुनी टोल प्लाज़ा पर कई शिकायतें आई थीं—ज्यादा शुल्क वसूलना, कर्मचारियों का बदसलूकी भरा रवैया और गलत रसीदें देना। लेकिन आर्मी जवान पर हमला सरकार के लिए आखिरी चेतावनी साबित हुआ।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
जांच में पाया गया कि टोल प्लाज़ा पर कई तरह की गड़बड़ियां हो रही थीं
– यात्रियों से दुर्व्यवहार, अवैध वसूली और कागज़ात में हेराफेरी।
जांच के बाद लिए गए फैसले बेहद सख्त रहे:
- भुनी टोल प्लाज़ा का लाइसेंस रद्द (Bhuni Toll Plaza License Cancelled)।
- ₹20 लाख का भारी जुर्माना।
- छह लोग गिरफ्तार, जिनमें वे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने सीधे जवान पर हमला किया।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम “भ्रष्टाचार और हिंसा के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस” का प्रतीक है।
आम लोगों पर असर
भुनी की घटना ने उन लाखों लोगों को झकझोर दिया जो रोज़ाना टोल से गुज़रते हैं। लोगों का कहना है कि अगर आर्मी जवान तक सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी कितनी बड़ी मुश्किल में है।
एक ट्रक ड्राइवर ने कहा—“हमारा आधा पैसा ईंधन और टोल में चला जाता है। अगर टोल कर्मचारी हमसे दुर्व्यवहार करेंगे तो यह खुली लूट जैसा है। जवान पर हमला देख कर लगा कि हम आम लोग कितने असुरक्षित हैं।”
क्यों खतरनाक हैं टोल घोटाले (Toll Plaza Corruption)?
- सरकारी राजस्व की हानि – फर्जी रसीद और गलत वसूली से विकास के लिए पैसा कम पड़ जाता है।
- भरोसे का संकट – जनता टोल की असलियत पर शक करने लगती है।
- ड्राइवरों का उत्पीड़न – ट्रक, टैक्सी और रोज़ाना सफर करने वाले सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।
- भ्रष्टाचार को बढ़ावा – अवैध वसूली से ब्लैक मनी का जाल फैलता है।
सरकार का रुख
सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी टोल ऑपरेटर कानून से ऊपर नहीं है।
आने वाले हफ्तों में कई टोल प्लाज़ाओं पर अचानक निरीक्षण होंगे।
एनएचएआई (NHAI) ने भी नए नियम लागू करने का ऐलान किया है:
- 100% डिजिटल भुगतान।
- रसीदें केवल डिजिटल।
- सीसीटीवी और जीपीएस मॉनिटरिंग।
- बायोमेट्रिक उपस्थिति ताकि कर्मचारी जवाबदेह हों।
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भुनी टोल प्लाज़ा का लाइसेंस रद्द होना सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि आम जनता की जीत है। जवान पर हमला करने वालों की गिरफ्तारी और ₹20 लाख जुर्माना इस बात का संदेश है कि भ्रष्टाचार और हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह घटना हर रोज़ टोल चुकाने वाले आम आदमी के लिए उम्मीद की किरण है। अब ज़रूरी है कि टोल से मिलने वाला पैसा सड़क और यात्रियों की सुरक्षा पर ही खर्च हो।
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