अयोध्या धाम में नॉन-वेज पर सख्ती: धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन का बड़ा फैसला
अयोध्या धाम, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है, न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एक अहम निर्णय लिया है। अब अयोध्या धाम क्षेत्र में नॉन-वेज भोजन की बिक्री और परोसने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला धार्मिक भावनाओं की रक्षा और पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।

अयोध्या धाम में नॉन-वेज पर सख्ती,क्यों लिया गया यह फैसला
अयोध्या धाम में नॉन-वेज पर सख्ती: पिछले कुछ समय से अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राम मंदिर निर्माण और धार्मिक आयोजनों के चलते यहां देश-विदेश से लोग पहुंच रहे हैं। ऐसे में कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि पवित्र नगरी में मांसाहारी भोजन की बिक्री पर रोक लगाई जाए। प्रशासन ने इन मांगों और धार्मिक संवेदनाओं को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया है।
सख्ती से लागू होंगे नए नियम
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, अयोध्या धाम की सीमा में आने वाले किसी भी होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट या ठेले पर नॉन-वेज भोजन बेचना या परोसना अब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से जांच अभियान चलाएं और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्राथमिकता
अयोध्या को एक सात्विक और पवित्र नगरी के रूप में देखा जाता है। यहां आने वाले अधिकांश श्रद्धालु शुद्ध शाकाहारी भोजन को ही पसंद करते हैं। ऐसे में मांसाहारी भोजन की मौजूदगी कई लोगों की भावनाओं को आहत कर सकती है। प्रशासन का मानना है कि इस फैसले से धार्मिक वातावरण और अधिक शांत, शुद्ध और अनुशासित बना रहेगा।
व्यापारियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस निर्णय पर स्थानीय व्यापारियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली देखने को मिली है। जहां कुछ व्यापारियों ने इसे अयोध्या की गरिमा बनाए रखने के लिए सही कदम बताया, वहीं कुछ लोगों को इससे आर्थिक नुकसान की चिंता भी है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि अयोध्या मुख्य रूप से धार्मिक पर्यटन का केंद्र है और यहां शाकाहारी भोजन की मांग पहले से ही अधिक है, इसलिए लंबे समय में व्यापार पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
पहले से मौजूद परंपरा को मिला कानूनी रूप
अयोध्या में पहले से ही अधिकांश लोग शाकाहारी जीवनशैली अपनाते रहे हैं।
कई क्षेत्रों में अनौपचारिक रूप से नॉन-वेज भोजन से परहेज किया जाता था।
अब इस परंपरा को प्रशासनिक आदेश के जरिए औपचारिक रूप दे दिया गया है,
जिससे किसी तरह का भ्रम या विवाद न रहे।
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सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की पहल
यह फैसला केवल भोजन तक सीमित नहीं है
बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
प्रशासन का मानना है कि जब कोई शहर अपनी परंपराओं और मूल्यों के अनुरूप नीतियां अपनाता है,
तो उसकी विशिष्ट पहचान और भी मजबूत होती है।
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