अंशु शिवरात्रि लापता मामला: 12 दिन बाद मिली दर्दनाक खबर
शिवरात्रि का दिन जहां आस्था और उम्मीद का प्रतीक होता है, वहीं एक परिवार के लिए वही दिन जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा बन गया। तीन बहनों का इकलौता भाई अंशु उस दिन घर से निकला और फिर कभी वापस नहीं लौटा। 12 दिन तक परिवार ने हर दरवाज़ा खटखटाया, हर उम्मीद से चिपका रहा, लेकिन अंत में जो खबर मिली, उसने सब कुछ तोड़ दिया। अंशु का शव बरामद हुआ और उसके दादा ने उसे उसके कपड़ों से पहचान लिया।

अंशु शिवरात्रि लापता मामला: त्योहार की सुबह और अचानक गुमशुदगी
यूपी के संभल स्थित धनारी पट्टी बालू शंकर में 12 दिन से लापता सात वर्षीय बालक अंशू का शव गांव से एक किलोमीटर दूर ग्राम प्रधान के खेत में मिलने से हड़कंप मच गया। शव क्षत-विक्षत हालत में होने पर मृतक के दादाजी ने कपड़ों से पहचान की। गले में काला अंगोछा कसा मिला है। जिससे प्रतीत होता है कि गला दबा कर हत्या कर शव खाद के प्लास्टिक के कट्टे में बंद कर फेंका गया है। मौके पर कट्टे को घसीटने के निशान भी मिले हैं। सूचना पाकर मौके पर पहुंची थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने छानबीन की। नमूने लेकर जांच को भेजे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने भी मौके पर पहुंच कर जानकारी ली है परिवार के अनुसार, शिवरात्रि की सुबह अंशु पूजा के बाद घर से बाहर निकला था। वह अक्सर दोस्तों के साथ आसपास के मंदिरों में जाता था। लेकिन उस दिन शाम तक जब वह घर नहीं लौटा, तो चिंता ने दस्तक दी। पहले तो परिजनों ने सोचा कि वह दोस्तों के यहां होगा, मगर रात होते-होते बेचैनी बढ़ गई। अगले दिन थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
12 दिन की तलाश, हर पल भारी
अंशु शिवरात्रि लापता मामला: अगले 12 दिन परिवार के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं थे। मां की आंखें दरवाजे पर टिकी रहीं, बहनें हर आहट पर चौंक जातीं और दादा हर सुबह उम्मीद के साथ निकलते कि शायद आज कोई खबर मिले। पुलिस ने आसपास के इलाकों, नदी किनारों और सीसीटीवी फुटेज की जांच की। गांव और पड़ोसी भी खोजबीन में जुटे रहे। लेकिन हर दिन उम्मीद थोड़ी-थोड़ी टूटती गई।
बरामद हुआ शव, कपड़ों से हुई पहचान
बारहवें दिन एक सूचना मिली कि पास के क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिला है। पुलिस ने परिवार को बुलाया। दृश्य इतना भयावह था कि पहचान करना आसान नहीं था। ऐसे में अंशु के दादा ने उसके पहने हुए कपड़ों को देखकर उसे पहचान लिया। वही शर्ट, वही पैंट—जिन्हें देखकर उन्होंने कांपती आवाज़ में कहा, “यह हमारा अंशु है।” यह पल पूरे परिवार के लिए असहनीय था।
तीन बहनों का इकलौता सहारा
अंशु तीन बहनों का इकलौता भाई था। घर में उसकी हंसी-खुशी ही रौनक थी। बहनों के लिए वह दोस्त, रक्षक और साथी सब कुछ था। उसकी अचानक मौत ने न केवल एक बेटे को छीन लिया, बल्कि तीन बहनों का सहारा भी छीन लिया। परिवार की आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारियां अब और भारी हो गई हैं।
पुलिस जांच और सवाल
पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।
मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
शुरुआती तौर पर यह साफ नहीं है कि यह हादसा था या किसी साजिश का नतीजा।
गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन सच सामने आना अभी बाकी है।
परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है।
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गांव में शोक की लहर
अंशु की मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
हर आंख नम थी और हर चेहरे पर एक ही सवाल—आखिर ऐसा क्यों हुआ?
त्योहार की खुशियां मातम में बदल गईं और घर का आंगन सन्नाटे से भर गया।
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