अहमदाबाद डिजिटल अरेस्ट घोटाला: डॉक्टर के 12 दिनों में ₹8 करोड़ गंवाए
हाल ही में अहमदाबाद में एक चौंकाने वाला साइबरक्राइम मामला सामने आया जिसमें एक बुजुर्ग डॉक्टर को “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” करके सिर्फ 12 दिनों में ₹8 करोड़ का चूना लगाया गया। यह केस दिखाता है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी किस तरह और भी स्मार्ट होती जा रही है और आम लोग कितने ज्यादा कमजोर हो रहे हैं।

फर्जी क्राइम ब्रांच कॉल से शुरू हुआ ठगी का खेल
88 साल के डॉक्टर, जो पलड़ी के परिमल गार्डन के पास क्लीनिक चलाते हैं, को 28 जुलाई को “मुंबई क्राइम ब्रांच” नाम वाले नंबर से व्हाट्सएप वीडियो कॉल मिली। कॉल करने वाले ने खुद को ED ऑफिसर बताया, और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी लेटर व नकली IDs दिखाकर कहा कि डॉक्टर का नाम जेट एयरवेज अकाउंट वाले बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है।
“डिजिटल अरेस्ट”, धमकी और मानसिक यातना
ठगों ने दावा किया कि डॉक्टर के नाम पर मुंबई अकाउंट में ₹5 लाख जमा हुए हैं, जिससे उन पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लग गया। जब डॉक्टर ने अनभिज्ञता जताई तो ठगों ने उनके नाम का डेबिट कार्ड दिखाया। डॉक्टर को धमकाया गया कि वे 40 दिन के लिए गिरफ्तार हो सकते हैं अगर सहयोग नहीं किया। उन्हें “एंटी-नेशनल” कहकर “डिजिटल अरेस्ट” घोषित किया गया और किसी को कुछ बताने से मना कर दिया गया।
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₹8 करोड़ की जालसाजी
मानसिक दबाव में आकर डॉक्टर ने अपनी सभी इंवेस्टमेंट्स और करीब ₹8 करोड़ के पोर्टफोलियो की जानकारी ठगों को दे दी। उन्होंने डॉक्टर से सारी रकम “रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया वेरिफाइड” अकाउंट्स में ट्रांसफर करने को कहा। 30 जुलाई से 12 अगस्त के बीच 7 RTGS ट्रांजेक्शन में डॉक्टर ने करीब ₹8 करोड़ चार अलग-अलग अकाउंट्स में भेज दिए।
परिवार और पुलिस से संपर्क करने के बाद डॉक्टर को ठगी का एहसास हुआ।
उन्होंने बताया कि वे “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” और “मानसिक रूप से प्रताड़ित” महसूस कर रहे थे।
क्राइम ब्रांच का एक्शन
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तेजी दिखाई और टेक्निकल एनालिसिस के बाद तीन आरोपी- पप्पू सिंह, आसिफ, और Vikas Singh को गिरफ्तार कर लिया। जांच में झारखंड व कंबोडिया में बैठे बड़े गिरोह का लिंक मिला। पुलिस ने लगभग ₹2.84 लाख के मोबाइल, लैपटॉप, कार्ड और डॉक्युमेंट्स जब्त किए।
बड़ा खतरा: डिजिटल अरेस्ट ठगी का ट्रेंड
“डिजिटल अरेस्ट” स्कैम दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
अक्सर साइबर ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर टेक्नोलॉजी से डर और अलगाव पैदा करते हैं,
जिससे पीड़ित लाखों-करोड़ों गंवा देते हैं। जानकारी व अलर्टनेस के बावजूद लोग इन चुनौतियों का शिकार हो रहे हैं।
डिजिटल दुनिया में खुद को सुरक्षित रखें
पुलिस ने फिर सलाह दी है कि अनजान या सरकारी पहचान वाले कॉल की अच्छे से जांच करें।
कभी भी बैंक या निवेश की जानकारी फोन या वीडियो पर न दें
और खतरा महसूस हो तो परिवार या पुलिस से तुरंत संपर्क करें।
डॉक्टर की कहानी एक बड़ा सबक है—भारत में साइबर जागरुकता जरूरी है।
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