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धिकौली स्कूल घटना: यूपी के इस जिले में मुस्लिम बच्चों ने स्कूल जाना क्यों छोड़ दिया?

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से जिले में हाल की घटना ने शिक्षा व्यवस्था, बच्चों के मानसिक विकास और समाजिक माहौल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव धिकौली के प्राथमिक विद्यालय संख्या 2 में घटी एक घटना ने न केवल स्कूल को विवाद में ला दिया, बल्कि इसके बाद कई मुस्लिम परिवारों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना लगभग बंद कर दिया है।

धिकौली स्कूल घटना

कहा जा रहा है कि अब विद्यालय में समुदाय विशेष के बच्चों में से सिर्फ एक बच्चा ही कभी-कभी स्कूल पहुंच रहा है, और इसके पीछे की वजह स्कूल में हुआ वह विवाद है जो 14 नवंबर को सामने आया था।


14 नवंबर की घटना: क्या हुआ था स्कूल में?

14 नवंबर को, जब स्कूल में सामान्य कक्षाएँ चल रही थीं,
तभी शिकायत आई कि तीन बच्चों ने एक अनुचित और गंभीर हरकत की है।
आरोप था कि तीन मुस्लिम बच्चों ने:

  • एक पानी की बोतल में पेशाब किया
  • और इसे अपने तीन सहपाठियों को पीने के लिए दे दिया

जैसे ही यह जानकारी परिजनों और गाँव वालों तक पहुँची,
स्कूल में भारी हंगामा शुरू हो गया।
परिजन स्वाभाविक रूप से आहत और क्रोधित थे।


बच्चे ने स्वीकार किया — यूट्यूब वीडियो देखकर नकल की हरकत

जांच के दौरान एक आरोपी बच्चे ने स्वीकार किया कि उसने यह हरकत जानबूझकर नहीं, बल्कि यूट्यूब पर देखे गए एक वीडियो की नकल करते हुए की।

उसने बताया कि पिता के मोबाइल पर यह वीडियो देखा, फिर इसे दोबारा चलाकर अपने साथियों को भी दिखाया।

यह तथ्य सामने आने के बाद यह बात स्पष्ट होती है कि बच्चे की हरकत का मूल कारण अशिक्षा, जागरूकता की कमी और इंटरनेट का अनियंत्रित उपयोग था,

न कि कोई जानबूझकर किया गया सामाजिक या साम्प्रदायिक उद्देश्य।


स्कूल में हंगामा, पुलिस केस और तनाव

  • घटना के बाद स्कूल में भीड़ जमा हो गई।
  • परिजन और ग्रामीण आरोपी बच्चों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
  • हेडमास्टर युधवीर सिंह ने पूरे मामले की रिपोर्ट चांदीनगर थाने में दर्ज करवाई।
  • यही नहीं, उन्होंने आरोपी बच्चों में से एक के पिता जावल हुसैन के खिलाफ भी रिपोर्ट लिखवाई।

स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना का असर स्कूल के माहौल पर गहराई से पड़ा।


मुस्लिम परिवारों में डर और असुरक्षा की भावना

घटना के बाद गाँव में तनाव भले न हो, लेकिन मुस्लिम परिवारों में चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।

इन परिवारों का कहना है कि:

  • बच्चों को अब स्कूल भेजने में डर लग रहा है
  • माहौल उनके बच्चों के लिए सुरक्षित है या नहीं, इस पर संशय है
  • वे नहीं चाहते कि यह घटना समुदाय की पहचान से जोड़ दी जाए
  • बच्चे अब स्कूल जाने से घबरा रहे हैं

इसका परिणाम यह हुआ कि कई परिवारों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, अब केवल एक मुस्लिम बच्चा कभी-कभी स्कूल पहुंचता है।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना कई स्तरों पर चिंताजनक है:

  1. बच्चों का इंटरनेट से प्रभावित होना
  2. अभिभावकों द्वारा मोबाइल की निगरानी में कमी
  3. स्कूल और समाज दोनों में संवाद की कमी
  4. एक गलती के कारण पूरे समुदाय के बच्चों का शिक्षा से कटना

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की घटनाओं में बच्चों को समझाने, माता-पिता को जागरूक करने और स्कूल द्वारा काउंसलिंग का आयोजन किए जाने की जरूरत है।


आगे क्या? समाधान की राह

  • प्रशासन ने परिस्थिति को संवेदनशील मानते हुए सभी परिवारों से बातचीत शुरू की है।
  • शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों को स्कूल से दूर रखना समस्या का समाधान नहीं।
  • प्रधानाचार्य और अध्यापकों ने भी माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को फिर से स्कूल भेजें।

इस तरह की घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि स्कूल, परिवार और समाज—तीनों को मिलकर बच्चों को सही दिशा देने की आवश्यकता है।

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निष्कर्ष

धिकौली स्कूल घटना केवल एक अनुचित बाल-व्यवहार की घटना नहीं,

बल्कि यह हमें उन चुनौतियों की याद दिलाती है जो आज के डिजिटल युग में बच्चे झेल रहे हैं।

सही निगरानी, संवाद और जागरूकता ही इस तरह की घटनाओं को रोक सकती है।

उम्मीद है कि शिक्षा विभाग, परिवार और समुदाय मिलकर इस समस्या का समाधान निकालेंगे और सभी बच्चे फिर सुरक्षित माहौल में स्कूल लौटेंगे।

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