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जिस दुर्लभ धातु के लिए चीन पर निर्भर था भारत, उसका उत्पादन यूपी में शुरू

भारतीय कंपनी Lohum उत्तर प्रदेश में देश की पहली इंटेग्रेटेड रियर अर्थ मैग्नेट प्लांट स्थापित कर रही है, जो कि एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी कदम है। यह प्लांट दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और मैग्नेट्स का उत्पादन करेगा, जिन पर भारत वर्षों से चीन पर भारी निर्भर था।

पहली इंटेग्रेटेड रियर अर्थ मैग्नेट प्लांट

इस प्रोजेक्ट की क्षमता 2,000 मेट्रिक टन की है और यह न केवल हल्के बल्कि भारी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों को भी परिष्कृत करेगा, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।

Lohum का महत्व

Lohum, जो पहले से भारत में कई महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन करता है, जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल, और एल्यूमीनियम, इस आधुनिक और उन्नत प्लांट के जरिए देश की स्वदेशी उत्पादकता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

इस परियोजना में लगभग ₹500 करोड़ का निवेश किया गया है

और इसे दो साल के भीतर पूरी तरह से चलाए जाने की योजना है।


दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का महत्व

दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements – REEs) उच्च तकनीक उत्पादों के लिए बेहद आवश्यक हैं।

ये इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस, रक्षा, और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल होते हैं।

भारत की दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि देश स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीक में भारी निवेश कर रहा है। 2025 में भारत की मांग लगभग 4,000 टन पहुंच चुकी है, जो 2030 तक 15,000 टन तक बढ़ने की आशंका है।


चीन पर निर्भरता कैसे घटेगी?

चीन के पास दुनिया की दुर्लभ पृथ्वी संपदाएं और उनके प्रसंस्करण का लगभग 90% नियंत्रण है।

इससे भारत सहित कई देश चीन के निर्यात नीतियों पर निर्भर हो जाते हैं,

जो कभी-कभी आपूर्ति में बाधाएं पैदा कर सकता है। Lohum का यह प्लांट इस स्थिति को बदलने का प्रयास है,

जिससे भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए घरेलू आपूर्ति और उत्पादन व्यवस्था विकसित कर सके।


उत्पादन क्षमता और भविष्य की संभावनाएं

2,000 मेट्रिक टन वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ, यह प्लांट पूरी भारत की दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट मांग का लगभग 20% 2027 तक पूरा करने की उम्मीद है। इसका सीधा लाभ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऊर्जा क्षेत्र, और रक्षा उद्योग को मिलेगा, जो देश की विकास योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।


सरकारी प्रोत्साहन और रणनीतियाँ

यह परियोजना भारत सरकार के कई महत्वाकांक्षी योजनाओं के अनुरूप है,

जैसे कि नेशनल क्रिटिकल माइनरल मिशन (NCMM), मे की एक्सटेंडेड सर्कुलर मिनरल स्ट्रेटजी (ECMS),

और भारी उद्योग मंत्रालय की ₹7,300 करोड़ की योजना, जो घरेलू मैग्नेट उत्पादन को बढ़ावा देती है।


आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

Lohum के इस कदम से केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता ही नहीं बढ़ेगी,

बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के स्थानीय रोजगार और संबंधित उद्योगों को मजबूती मिलेगी, जिससे पूरे क्षेत्र में समृद्धि आएगी।

इस प्लांट के माध्यम से भारत एक स्थायी उत्पादन नेटवर्क का निर्माण करेगा, जो आने वाले दशकों तक देश को आर्थिक और तकनीकी तौर पर मजबूत बनाए रखेगा।

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भारतीय कंपनी Lohum द्वारा उत्तर प्रदेश में स्थापित यह पहली एकीकृत दुर्लभ पृथ्वी मैग्नेट प्लांट भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ी सफलता है।

यह भारत को चीन पर निर्भरता कम करने और तकनीकी क्षेत्र में स्वावलंबी बनने में मदद करेगा।

साथ ही, इस प्रोजेक्ट से देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, और पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा।

यह भारत के लिए आने वाले समय में एक मजबूत और स्थायी भविष्य की नींव साबित होगा।

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