अब हर नया स्मार्टफोन लेकर आएगा Sanchar Saathi ऐप – Apple जैसी कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती
डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा हर नागरिक की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। ठगी, स्कैम कॉल, नकली ऐप्स और डिजिटल धोखाधड़ी बढ़ने के बीच भारत सरकार अब डिजिटल सुरक्षा को नई मजबूती देने जा रही है। इसी दिशा में दूरसंचार मंत्रालय ने बड़ा आदेश जारी किया है – सभी स्मार्टफोन कंपनियों को अपने नए फोन में Sanchar Saathi ऐप प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा।

यह Sanchar Saathi ऐप फोन से हटाया नहीं जा सकेगा, यानी यह एक “अनडिलीटेबल ऐप” होगा।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इसी वजह से Apple जैसी कंपनियों के साथ टकराव की स्थिति बन सकती है,
क्योंकि Apple लंबे समय से ऐसे सरकारी हस्तक्षेप से बचता आया है।
Sanchar Saathi ऐप आखिर क्या है?
यह ऐप दूरसंचार मंत्रालय द्वारा बनाया गया एक आधिकारिक साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म है।
इसका उद्देश्य है:
- मोबाइल चोरी की शिकायत
- फर्जी सिम की पहचान
- धोखाधड़ी नंबरों की रिपोर्ट
- ब्लॉक/ट्रेस मोबाइल
- सुरक्षित दूरसंचार प्रणाली
सरकार का मानना है कि अगर यह ऐप हर फोन में होगा,
तो आम जनता डिजिटल ठगी से काफी हद तक सुरक्षित रह सकेगी।
यह ऐप अनिवार्य क्यों किया जा रहा है?
भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन सर्विस और मोबाइल बैंकिंग तेजी से बढ़ रही है।
इसके साथ साइबर अपराध भी कई गुना बढ़ चुका है।
सरकार का तर्क है:
- लोग साइबर सुरक्षा नियम नहीं जानते
- स्कैम कॉल आम लोगों को ठग लेती हैं
- मोबाइल चोरी और फर्जी सिम मामलों में वृद्धि
- धोखाधड़ी नंबरों पर कार्रवाई में मुश्किल
Sanchar Saathi इन्हीं समस्याओं का समाधान है।
Apple क्यों हो सकता है विरोध में?
Apple कई वर्षों से अपने सिस्टम पर थर्ड पार्टी ऐप्स जबरन डालने के नियमों का विरोध करता रहा है।
मुख्य कारण:
1. सुरक्षा और नियंत्रण
Apple का कहना है कि iOS सिस्टम में प्री-इंस्टॉल ऐप्स जोड़ना उसके सुरक्षा ढांचे को प्रभावित करता है।
2. ऐप को अनइंस्टॉल न कर पाना
Apple आमतौर पर ऐसे अनडिलीटेबल ऐप्स की अनुमति नहीं देता जो तीसरी पार्टी (सरकार) द्वारा हों।
3. उपयोगकर्ता स्वतंत्रता का मुद्दा
कंपनी का मानना है कि फोन में क्या रहे और क्या नहीं, यह उपयोगकर्ता का अधिकार होना चाहिए।
4. प्राइवेसी से संबंधित सवाल
Apple प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को अपनी ब्रांड पहचान का मुख्य हिस्सा बताता है।
सरकारी ऐप की अनिवार्यता उसके सिद्धांतों से मेल नहीं खाती।
Reuters की रिपोर्ट में इसी बात को “संभावित संघर्ष” कहा गया है।
भारत सरकार का तर्क: उपयोगकर्ता सुरक्षा सर्वोपरि
सरकार का कहना है:
- यह ऐप केवल सुरक्षा के लिए है
- नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है
- कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों के अनुसार काम करना चाहिए
- ऐप किसी भी प्रकार का संवेदनशील डेटा नहीं लेता
- यह साइबर अपराध से लड़ने का सशक्त हथियार है
सरकार के अनुसार, यदि हर फोन में यह सुविधा होगी तो ठगी रुकने में तेजी आएगी।
स्मार्टफोन कंपनियों के सामने नई चुनौती
केवल Apple ही नहीं, अन्य कंपनियों—Samsung, Xiaomi, Oppo, Vivo और Realme – को भी अब अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम में बदलाव करना होगा।
उन्हें:
- ऐप को सिस्टम लेवल पर जोड़ना
- अपडेट रोलआउट बनाना
- नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू करना
- बायोमेट्रिक और नेटवर्क इंटीग्रेशन करना
जैसे तकनीकी कदम उठाने होंगे।
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उपभोक्ता पर क्या असर होगा?
फायदे:
✔ साइबर सुरक्षा मजबूत
✔ चोरी या ठगी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई
✔ फर्जी कॉल/SIM पहचान
✔ सरकारी प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता
संभावित चिंताएं:
– अनइंस्टॉल न कर पाने की समस्या
– डेटा प्राइवेसी को लेकर प्रश्न
– फोन के सिस्टम स्पेस पर प्रभाव
– Apple और अन्य कंपनियों के अनुभव में बदलाव
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