Happy Patel film: ‘बॉर्डर 2’ के कैटरिंग बजट में बनी ‘हैप्पी पटेल’, वीर दास ने किया खुलासा
फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर बड़े बजट और भव्य सेट्स की चर्चा होती है, लेकिन कभी-कभी सबसे दिलचस्प कहानियां कम बजट से जुड़ी होती हैं। हाल ही में कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने एक ऐसा ही चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘हैप्पी पटेल’ इतनी कम लागत में बनी थी कि उसका बजट फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के कैटरिंग खर्च के बराबर था। इस बयान के बाद बॉलीवुड में रचनात्मकता और बजट को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

‘Happy Patel film’ की अनोखी शुरुआत
वीर दास के अनुसार,Happy Patel film किसी बड़े स्टूडियो प्रोजेक्ट की तरह शुरू नहीं हुई थी। यह एक प्रयोगात्मक फिल्म थी, जिसमें कहानी और कंटेंट को सबसे ज्यादा अहमियत दी गई। सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने पूरी ईमानदारी से काम किया। यही वजह रही कि कम बजट के बावजूद फिल्म अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही।
‘बॉर्डर 2’ के कैटरिंग बजट का जिक्र क्यों खास?
वीर दास ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जिस रकम में ‘हैप्पी पटेल’ बनी, उसी रकम में ‘बॉर्डर 2’ जैसी बड़ी फिल्म का कैटरिंग खर्च पूरा हो सकता था। इस तुलना का मकसद सिर्फ हंसी नहीं, बल्कि यह दिखाना भी था कि सिनेमा में पैसा ही सब कुछ नहीं होता। अगर कहानी मजबूत हो और कलाकारों में जुनून हो, तो सीमित बजट भी बड़ी बात कर सकता है।
आमिर खान का अहम योगदान
इस पूरे खुलासे में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि वीर दास ने आमिर खान का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आमिर खान ने ‘हैप्पी पटेल’ की कहानी में कई महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए थे। आमिर खान अपनी बारीकी और परफेक्शन के लिए जाने जाते हैं, और उन्होंने कहानी को ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ रचनात्मक सुझाव दिए। इन बदलावों से फिल्म की कहानी और किरदारों को गहराई मिली।
कहानी में क्या बदला?
वीर दास के मुताबिक, आमिर खान ने फिल्म के नैरेटिव और किरदारों की सोच पर खास ध्यान दिया। उन्होंने यह सुझाव दिया कि कहानी सिर्फ मनोरंजन तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें भावनात्मक और सामाजिक पहलू भी उभरकर आएं। इससे फिल्म ज्यादा वास्तविक और दर्शकों से जुड़ने वाली बन सकी।
इंडस्ट्री के लिए एक सीख
यह किस्सा बॉलीवुड के लिए एक अहम संदेश देता है।
आज जब फिल्मों के बजट लगातार बढ़ते जा रहे हैं, FOLLOW
‘हैप्पी पटेल’ जैसी फिल्म यह साबित करती है
कि सिनेमा की आत्मा कहानी और प्रस्तुति में होती है
न कि सिर्फ बड़े सेट्स और महंगे तकनीकी साधनों में।
वीर दास का यह अनुभव उन नए फिल्ममेकर्स के लिए प्रेरणा है, जो सीमित साधनों के बावजूद कुछ नया करना चाहते हैं।
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दर्शकों की बदलती पसंद
वीर दास का मानना है कि आज का दर्शक सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि दमदार कंटेंट देखना चाहता है।
यही वजह है कि कम बजट की लेकिन सशक्त कहानी वाली फिल्में भी अपनी जगह बना रही हैं।
हैप्पी पटेल’ का उदाहरण इस बदलाव को साफ तौर पर दर्शाता है।
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