EU action against Iran: अमेरिका से तनाव के बीच ईयू की ईरान पर बड़ी कार्रवाई, खामेनेई की बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चले आ रहे तनाव के बीच अब यूरोपीय संघ (EU) ने भी ईरान के खिलाफ बड़ा और सख्त कदम उठा लिया है। इस फैसले ने न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की चिंताएं भी कई गुना बढ़ा दी हैं।

🔍EU action against Iran: ईयू ने क्या बड़ा कदम उठाया?
EU action against Iran: यूरोपीय संघ ने हाल ही में ईरान पर नई पाबंदियों (Sanctions) की घोषणा की है। ये प्रतिबंध खास तौर पर ईरान के ड्रोन प्रोग्राम, सैन्य सहयोग और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों पर लगाए गए हैं। ईयू का आरोप है कि ईरान न केवल अपने क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी खुलकर उल्लंघन कर रहा है।
इसके साथ ही यूरोपीय देशों ने ईरान के कुछ शीर्ष सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों की संपत्तियां फ्रीज करने और यात्रा प्रतिबंध लगाने का भी फैसला किया है।
🇺🇸 अमेरिका से पहले ही बिगड़े हुए हैं रिश्ते
अमेरिका और ईरान के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा हो गया। हाल के महीनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने कई बार चेतावनी दी है।
EU action against Iran: अब जब यूरोपीय संघ भी अमेरिका के रुख के करीब आता दिख रहा है, तो ईरान खुद को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग महसूस कर रहा है।
😟 खामेनेई की चिंता क्यों बढ़ी?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है।
एक ओर देश की आर्थिक हालत पहले ही कमजोर है—महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन से जनता परेशान है।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के और सख्त होने से ईरान की
तेल निर्यात क्षमता और विदेशी निवेश पर गहरा असर पड़ सकता है।
ईयू की इस कार्रवाई से यह साफ संकेत जाता है कि पश्चिमी देश अब ईरान के प्रति और कठोर नीति अपनाने के मूड में हैं।
🌍 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की स्थिति
ईरान पहले ही कई पश्चिमी देशों से कट चुका है और अब अगर यूरोप भी पूरी तरह विरोधी खेमे में चला जाता है,
तो ईरान के पास सीमित विकल्प ही बचेंगे। रूस और चीन जैसे देशों का समर्थन जरूर है,
लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था में यूरोप की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ईरान को या तो बातचीत की मेज पर आने को मजबूर करेगी
या फिर वह और आक्रामक रुख अपना सकता है।
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🔮 आगे क्या होगा?
आने वाले समय में ईरान, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।
अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो इसका असर मध्य पूर्व की स्थिरता
और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
ईयू की यह कार्रवाई खामेनेई के लिए एक साफ संदेश है
कि अब अंतरराष्ट्रीय दबाव को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
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